धैर्य
Thursday, January 21, 2010
| धैर्य | ||||
| जसं की...कांदा | ||||
| कांद्याच्या आत वाटी... | ||||
| वाटीच्या आत वाटी... | ||||
| वाटीत वाटी...वाटीत वाटी... | ||||
| कांदाणू... | ||||
| परमकांदाणू... | ||||
| आणखी आत...आत आsत... | ||||
| अगदी आssत?... | ||||
| माहित नाही...... | ||||
| जसं की...कांदा | ||||
| त्याच्यावर हवा... | ||||
| त्याच्याभोवती हवा... | ||||
| हवेभोवती हवा... | ||||
| तिचे थरांवर थर... | ||||
| मग...निर्वात... | ||||
| अंधार... | ||||
| अंतराळ... | ||||
| अंतराळं... | ||||
| बाहेर... | ||||
| अगदी बाsहेर... | ||||
| अगदी बाssहेरचं? | ||||
| माहित नाही...... | ||||
| ...ती पडल्या पडल्या डोळाभर बघते मला | ||||
| आणि मग डोळे मिटून हातांनी ’चाचपत’ राहते, | ||||
| सद्ध्या तिच्या असलेल्या हातांनी’ | ||||
| सद्ध्या माझा असलेला चेहरा...... | ||||
| ही कविता खरं तर भीत भीत... | ||||
| कापर्या कापर्या हातांनी | ||||
| तिलाच लिहायची होती एकदा... | ||||
| तिचं धैर्य होत नाही...माझं होतं...एवढंच ! | ||||
| ------------------------------------- संदीप . | ||||


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