सरीवर सर…
Thursday, January 21, 2010
| सरीवर सर… | |||
| दूर दूर नभपार डोंगराच्या माथ्यावर | |||
| निळे निळे गार गार पावसाचे घरदार | |||
| सरीवर सर.. | |||
| तडा तडा गार गारा गरा गरा फ़िरे वारा | |||
| मेघियाच्या ओंजळीत वीज थिजलेला पारा | |||
| दूरवर रानभर नाचणारा निळा मोर | |||
| मोरपीस मखमल उतू गेले मनभर | |||
| सरीवर सर.. | |||
| थेंब थेंब मोती ओला थरारत्या तनावर | |||
| शहार्याचे रान आले एका एका पानावर | |||
| ओल्या ओल्या मातीतून भिजवेडी मेघधून | |||
| फ़िटताना नवे ऊन झाले पुन्हा नवथर | |||
| सरीवर सर.. | |||
| उधळत गात गात पाय पुन्हा परसात | |||
| माती मऊ काळी साय हूर हूर पावलात | |||
| असे नभ झरताना घरदार भरताना | |||
| आले जल गेले जल झाले जल आरपार | |||
| सरीवर सर.. | |||
| अशा पावसात सये व्हावे तुझे येणेजाणे | |||
| उमलते ओले रान रान नव्हे मन तुझे | |||
| जशी ओली हूर हूर तरारते रानभर | |||
| तसे नाव तरारावे मझे तुझ्या मनभर | |||


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