आठवतं तुला ?
Thursday, January 21, 2010
| आठवतं तुला ? | ||
| आठवतं तुला त्या भेटीत | ||
| रिमझिम सरींनी छेडलं होतं . | ||
| भर दुपारी मला जणू | ||
| चांदण्याने वेढलं होतं . | ||
| आठवतं तुला त्या भेटीत | ||
| श्रावण धुंद बहरला होता . | ||
| ओल्या ऋतूत ओल्या स्पर्शाने | ||
| ओला देह शहारला होता . | ||
| आठवतं तुला त्या भेटीत | ||
| दोघे व्याकुळ झालो होतो . | ||
| तुझा गंध वेचता वेचता | ||
| मीही बकुळ झालो होतो . | ||
| आठवतं तुला त्या भेटीत | ||
| भावनांनी कविता रचली होती . | ||
| माझ्या डोळ्यात तू अन | ||
| तुझ्या डोळ्यात मी वाचली होती. | ||
| आठवतं तुला त्या भेटीत | ||
| आणखी काय घडलं होतं ? | ||
| मला स्मरत नाही पुढचं | ||
| बहुतेक तेव्हाच स्वप्न मोडलं होतं . | ||
| - संदिप खरे | ||


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